मोतिहारी।
जिला भीबीडी नियंत्रण पदाधिकारी शरद चन्द्र शर्मा ने बताया पूर्वी चम्पारण में कालाजार से बचाव क़ो लेकर जुलाई माह से प्रभावित स्थानों पर कीटनाशकों का छिड़काव शुरू किया जाएगा। इससे पूर्व आशा व स्वास्थ्य कर्मियों के सहयोग से जिले में घर घर खोज अभियान चलाया गया है, कालाजार के खात्मे के लिए स्वास्थ्य विभाग प्रयासरत है। उन्होंने बताया की लोगों को कालाजार के बारे में जागरूक करने के लिए अभियान चलाया जाएगा, जिससे इसके मामलों में कमी आए। डॉ शर्मा ने कहा की बालू मख्खी के काटने से कालाजार होता है,, अगर किसी क़ो- 2 हफ्ते से ज्यादा समय से बुखार हो तो इसकी जाँच जरूर कराए।सभी पीएचसी में इसकी जाँच की सुविधाएं है, वहीं ईलाज सिर्फ सदर अस्पताल मोतिहारी, कल्याणपुर, चकिया, मधुबन में उपलब्ध है।
महादलित बस्तियों, झुग्गी-झोपडी में कालाजार से बचाव के लिये लोगों को जागरूक करने के साथ साथ सिंथेटिक पाइरोथाइराइड कीटनाशकों का छिड़काव किया जाता है। लोगों में कालाजार से बचाव के लिए तरह तरह के सुझाव, व परामर्श दिए जा रहे हैं। सभी अपने आस पड़ोस के वातावरण को साफ सुथरा रखने, शौचालय की सफ़ाई करने एवं मछड़दानी का प्रयोग करने की सलाह दी जाती है। वहीँ भिबीडीसीओ धर्मेन्द्र कुमार ने बताया कालाजार को जड़ से समाप्त करने के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा, आईसीडीएस, जीविका एवं अन्य विभागों के समेकित प्रयास पर बल दिया गया है ।सरकारी अस्पतालों में मुफ्त ईलाज किया जाता है। साथ ही आर्थिक सहयोग भी दिया जाता है। बिहार सरकार मुख्यमंत्री कालाजार श्रम क्षतिपूर्ति योजना से 6600, भारत सरकार की ओर से 500 कुल 7100 रूपये वहीं कालाजार पीकेडीएल पर 4000 रूपये भारत सरकार से क्षति पूर्ति राशि दी जाती है।जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ शरदचन्द्र शर्मा ने बताया पहले कीटनाशक दवा का छिड़काव दीवार पर छह फुट तक होता था, अब वह पूरी दीवार पर हो रहा है।
– छिड़काव के वक्त ध्यान में रखने वाली बातें:
– घर की दीवारों में पड़ी दरारों को भर दें
– अच्छी तरह से घर की सफाई करें। खाने-पीने का सामान, बर्तन, दीवारों पर टंगे कैलेंडर आदि को बाहर निकाल दें।
– भारी सामानों को कमरे के मध्य भाग में एकत्रित कर दें और उसे ढक दें।
– रसोईघर, गौशाला सहित पूरे घर में पूरी दीवार पर दवा का छिड़काव कराएं।
– कालाजार के निम्नलिखित लक्षण हैं:
– रुक-रुक कर बुखार आना
– भूख कम लगना
– शरीर में पीलापन और वजन घटना
– तिल्ली और लिवर का आकार बढ़ना
– त्वचा सूखी और पतली होना
– बाल का झड़ना



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