मोतिहारी।
लोकसभा चुनाव बित जाने के बाद परिणाम जानने को लेकर उत्सुक लोगों के सामने आज एग्जिट पोल फिर से चुनावी तापमान बढा दिया है। अभी हार जीत को लेकर लोगों में उत्पन्न संशय की स्थिति को एग्जिट पोल रोमांच बढा दिया है। एक बार फिर से क्षेत्र में राजनीतिक तपमान परवान पर चढ गया है। एग्जिट पोल पर किसी को इकरार है तो कोइ इससे इंकार कर रहा है। सियासी बिसात में एग्जिट पोल के बाद जहां उत्साहित इनडीए समर्थकों में अपने प्रत्याशी के प्रति जीत का भरोसा और बढ गया है तो वहीं महागठबंधन समर्थक इस एक्जिट पोल को सिरे से खारिज कर रहे है, तो कुछ लोगों में मायूसी भी है। वहीं कुछ लोग इसे बकवास भी मान रहे है। चुनाव बाद हार जीत की गणना से लेकर प्रधानमंत्री बनने तक की चर्चा जोरों पर है। चुनाव के बाद परिणाम को लेकर लोगों मे खासे चर्चा और तर्क वेतर्क जारी था। इसी बीच एग्जिट पोल किसी के लिए खुशी तो किसी के लिए गम दे गया। यह दिगर बात है कि इसे लोग केवल अनुमान बताना हीं मान रहे है। वावजूद भी इसे समय की पुकार और मतदाताओं की नब्ज व हालात मान रहे है। जिन्हें एग्जिट पोल पर भरोसा भी है। वैसे भी ज्यों-ज्यों मतगणना का दिन नजदीक आ रहा है लोगों में उत्सुकता बढता जा रहा है। लोग उस दिन का बेसब्री से इंतजार कर रहे है। जीस दिन इबीएम में बंद प्रत्याशियों का भाग्य खुलेगा और एग्जिट पोल के ओपेनियन पर बिराम लगेगा। वैसे भी चुनाव के बाद लोगों की नजर एग्जिट पोल पर टिकी हुई थी। पर ज्यों हीं एग्जिट पोल सार्बजनिक हुआ लोगों की धडकने और तेज हो गई। जीत के प्रति आश्वस्त एनडीए समर्थकों का खुशी सातवें आसमान पर है। वहीं जीत की दावा करने वाले महागठबंधन के समर्थकों में निराशा की स्थिति। फिर भी एग्जिट पोल को नजरअंदाज करते हुए उन्हें अपने प्रत्याशी का जीत का भरोसा है। तो वहीं कुछ लोग दबी जुबान से एग्जिट पोल को बकवास करार दे रहे है।
ओपेनियन के बाद जीत हार की चर्चा गांव-गली, खेत-खलिहान, चौक-चौराहे व चाय-पान की दुकान व होटलों में जोर पकड लिया है। जहां एक तरफ सांसद चुने जाने की बात तो वहीं पुनः नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने की कयास के साथ तमाम दावे प्रतिदावे का सिलसिला जारी है। लोग अपने अपने प्रत्याशी का जीत सुनिश्चित बता रहे है। तो वहीं एग्जिट पोल पर भरोसा जताते हुए अधिकाशतः लोग नरेन्द्र मोदी को दुबारा पीएम बनना तय मान रहे है। इससे एकबार फिर से एनडीए समर्थकों का उत्साह और बढ गया है। वहीं एग्जिट पोल के बाद शांत पडे मतदाता व कार्यकर्ता अब अपने अपने प्रत्याशियों के पक्ष में खुलकर बोलने लगे है।
जहां आम मतदाता चुनाव में किसके द्वारा बाजी मारने की कयास लगा रहे है। वहीं राजनीतिक दल के सक्रिय कार्यकर्ता एवं नेता प्रखंड में अपने अपने प्रत्याशी व पार्टी की लिडिंग होने की बात कर रहे है। कोई नरेन्द्र मोदी के नाम पर तो कोई इनके बिरोधी वोट को गोलबंदी करने की पक्ष रख रहा है। तो कोई विकास के नाम पर वोट पडने की बात कर रहा है। इसको लेकर गांव से शहर तक हार जीत के तमाम कयासों के बीच 4 जून का बेसब्री से इंतजार कर रहे है।




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