मोतिहारी।
चीनी मिल द्वारा नदियों में प्रदूषित पानी छोड़े जाने व हो रहे नुकसान का मुद्दा अब विधानसभा में भी उठने लगी है। सुगौली के विधायक राजेश कुमार उर्फ बब्लू गुप्ता ने इस मुद्दे को विधानसभा में उठाया है। विधायक श्री गुप्ता ने अपने सवाल में पूछा है कि
क्या यह बात सही है कि जिला पूर्वी चम्पारण अन्तर्गत प्रखंड सुगौली के बीचो-बीच होकर बुढी गंडक नदी प्रवाहित होती है। जिसमें मिलनेवाली छोटी नदियां रामरेखा नदी, हड़बोडा नदी एवं कोहड़ा नदी प्रमुख है। क्रमशः रामनगर चीनी मिल, नरकटियागज चीनी मिल एवं मझौलिया चीनी मिलों द्वारा बड़े पैमाने पर इन नदियों में अवशिष्ट (पदूषित) गंदे एवं जहरीले पानी प्रवाहित करती रहती है। जिसके परिणाम स्वरूप जल में फैल रहे प्रदूषण से मछलियां मर रही है। पशु बीमार हो रहे है, हजारो एकड़ खेतों की सिंचाई नहीं हो पा रही है तथा प्रदूषित पानी से नदी किनारे बसे आमलोगों के स्वास्थ्य पर भी खराब प्रभाव पड़ रहा है, यदि हां तो सरकार कब तक उक्त वर्णित स्थिति को ध्यान में रखते हुए बुढी गड़क नदी के जल को प्रदूषण मुक्त कराने का विचार रखती है, नहीं तो क्यो ?
विधायक श्री गुप्ता द्वारा पूछे जाने वाले तारांकित प्रश्न के उतर में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के मंत्री डॉ० प्रमोद कुमार ने बताया कि आंशिक रूप से स्वीकारात्मक है। सर्वश्री मझौलिया सुगर इंडस्ट्री का दिनांक 18.12.2025 के निरीक्षण में अनुपचारित औद्योगिक बहिस्राव कोहरा नदी होता पाया गया। माननीय राष्ट्रीय हरित अधिकरण के आदेशानुसार “प्रदूषणकर्ता द्वारा भुगतान के सिद्धांत” के तहत मझौलिया सुगर इंडस्ट्री को नौ लाख रूपए एवं मझौलिया सुगर इंडस्ट्री (डिस्टीलरी डिवीजन) को नौ लाख रुपए मात्र का पर्यावरणीय वैधानिक प्रावधानों के तहत जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 की धारा 43, 44 एवं 45ए के अंतर्गत नियमानुकूल जुर्माना लगाने हेतु आदेश पारित किया गया है। हरिनगर चीनी मिल लि., रामनगर एवं मगध सुगर एवं एनर्जी लि. (नरकटियागंज चीनी मिल) को दिनाक 21.01.2026 को किए गए निरीक्षण में इकाई से बहिस्राव का निस्सरण होता नहीं पाया गया। राज्य सरकार द्वारा किये जा रहे प्रयासों के कारण वर्ष 2024 में बुढ़ी गंडक के जल की गुणवत्ता में सुधार पाया गया है, जो केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, दिल्ली द्वारा अक्टूबर, 2025 में जारी प्रतिवेदन में भी दर्शाया गया है।


