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April 21, 2026 3:51 pm

IAS Coaching

पारामेडिकल कॉलेज में एकदिवसीय प्रशिक्षण आयोजित

चमकी बुखार के लक्षणों की समय पर पहचान और इलाज जरूरी : डॉ. पंकज,पारामेडिकल कॉलेज में एकदिवसीय प्रशिक्षण आयोजित

मोतिहारी।
जिले में चमकी बुखार (एईएस) एवं मस्तिष्क ज्वर (जेई) से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सक्रिय हो गया है। संभावित खतरों को देखते हुए जिला स्तर पर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। इसी क्रम में गुरुवार को सदर अस्पताल स्थित जीएनएम भवन में जीएनएम, एएनएम, सीएचओ एवं स्टाफ नर्स सहित कुल 85 स्वास्थ्यकर्मियों को एकदिवसीय प्रशिक्षण दिया गया।
यह प्रशिक्षण सदर अस्पताल के पीकू इंचार्ज डॉ. पंकज, डॉ. फिरोज आलम, डॉ मनीष एवं वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी रविंद्र कुमार के नेतृत्व में आयोजित किया गया। प्रशिक्षण के दौरान चिकित्सकों ने चमकी बुखार से पीड़ित बच्चों के त्वरित एवं समुचित उपचार के बारे में विस्तृत जानकारी दी। साथ ही रोग के कारण, लक्षण, बचाव और इलाज के विभिन्न पहलुओं पर भी प्रकाश डाला गया।

डॉ. पंकज ने कहा कि चमकी बुखार के लक्षण दिखाई देते ही बच्चों को बिना देर किए एम्बुलेंस या निजी वाहन से नजदीकी सरकारी अस्पताल पहुंचाना चाहिए। समय पर इलाज मिलने से गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों के खान-पान और दिनचर्या पर विशेष ध्यान देने की अपील की। वहीं, जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. शरत चंद्र शर्मा ने सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। उन्होंने बताया कि ओआरएस पाउडर एवं पैरासिटामोल की गोलियां पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रखी जा रही हैं ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत इलाज शुरू किया जा सके।

बीडीसीओ रविंद्र कुमार ने जानकारी दी कि 28 फरवरी को चिकित्सा पदाधिकारियों के लिए भी विशेष प्रशिक्षण आयोजित किया जाएगा। उन्होंने अभिभावकों को सलाह दी कि बच्चों को रात में खाली पेट न सोने दें, समय-समय पर जगाकर कुछ मीठा खिलाएं और किसी भी तरह की समस्या होने पर तुरंत अस्पताल लेकर जाएं। सदर अस्पताल के पीकू वार्ड में 24 घंटे आपातकालीन इलाज की सुविधा उपलब्ध है।

*लक्षणों की पहचान और बचाव के उपाय*

मस्तिष्क ज्वर या चमकी बुखार के प्रमुख लक्षणों में तेज बुखार आना जो पांच से सात दिनों से ज्यादा का हो, शरीर में चमकी होना अथवा हाथ पैर में थरथराहट होना, मानसिक संतुलन का ठीक न होना और शरीर के किसी खास अंग में लकवा मार जाना शामिल है। ऐसी स्थिति दिखने पर तत्काल गांव की आशा या एएनएम दीदी से संपर्क करना चाहिए और अविलंब निकटतम स्वास्थ्य केंद्र पर चिकित्सा परामर्श लेना चाहिए। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि बच्चों को तेज धूप से बचाएं, उन्हें दिन में दो बार स्नान कराएं और रात में भरपेट खाना खिलाकर ही सुलाएं। इसके अलावा बच्चों को ओआरएस अथवा नमक-चीनी और नींबू पानी का शरबत पिलाते रहना चाहिए।

आपातकालीन स्थिति में तुरंत लें डॉक्टरी सहायता:
आपातकालीन स्थिति में मरीज को किसी भी प्रकार की देरी किए बिना अस्पताल पहुँचाना चाहिए क्योंकि चिकित्सकीय परामर्श में देरी मरीज की स्थिति को गंभीर बना सकती है। स्वास्थ्य विभाग ने सूचित किया है कि किसी भी आपातकालीन स्थिति में निःशुल्क एम्बुलेंस हेतु टोल फ्री नंबर एक सौ दो पर डायल किया जा सकता है। साथ ही स्वास्थ्य संबंधी तत्काल सेवा एवं शिकायत हेतु टोल फ्री नंबर एक सौ चार भी जारी किया गया है। अभिभावकों को विशेष रूप से सचेत किया गया है कि वे अंधविश्वास या ओझा-गुनी के चक्कर में समय नष्ट न करें और बच्चे की स्थिति बिगड़ने पर तुरंत डॉक्टर की सलाह लें।

 

Khabare Abtak
Author: Khabare Abtak

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