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March 15, 2026 11:35 pm

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धान की खेती किसानों के लिए मुश्किल बन गई, धान की खेती में खरपतवार और पानी की दोहरी मार

मोतिहारी।

धान की खेती इस बार किसानों के लिए मुश्किल बन गई है। खेतों में नाहक खरपतवार और सिंचाई के साधनों की कमी ने परेशानी बढ़ा दी है। गेहूं की कटाई के बाद खेतों को धान की रोपनी के लिए तैयार किया गया था। बिचड़ा गिराने के बाद खेतों में मोथा, दुब, लगेनवा, घुरमी, तिरकोल और भांग जैसे खरपतवार उग आए। खेतों में लतर भी फैल गई है। इससे रोपनी में बाधा आ रही है। खरपतवार धान के बिचड़े को नुकसान पहुंचा रहे हैं। खेतों की जुताई के पंद्रह दिन बाद ही खरपतवार की भरमार हो गई। इससे किसानों को दोबारा जुताई करनी पड़ी। बिचड़ा तैयार होने के बाद भी खरपतवार और लतर ने परेशानी बढ़ा दी है। खेतों में खरपतवार की अधिकता से जुताई और रोपनी में दिक्कत हो रही है। किसानों को अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है। पहले गुड़ाई, जुताई और कीटनाशक के छिड़काव के बावजूद लतर नुकसान पहुंचा रही है। सिंचाई की व्यवस्था नहीं होने से खेतों में पानी पटाना भी मुश्किल हो गया है।

किसान हरेन्द्र प्रसाद ने बताया कि सात कट्ठा खेत में रोपनी के लिए एक दिन पहले मोटर से पानी पटवाया। सुबह तक आधे से कम खेत में ही पानी पहुंचा। छह मजदूर लगाए गए थे। अगले दिन तीन मजदूर और बुलाने पड़े। इससे एक दिन का समय और बढ़ गया।
बारिश नहीं होने से परेशानी और बढ़ गई है। किसान उपेन्द्र यादव, लालबाबू प्रसाद और नागेन्द्र यादव ने बताया कि बारिश के अभाव में खेत में पानी पटाकर बिचड़ा गिराया गया। फिर सूखते बिचड़े में दोबारा पानी देना पड़ा। अब रोपनी के लिए भी महंगे दाम पर पटवन कराना पड़ेगा। खेतों में भी खरपतवार जम गया है। सिंचाई के अभाव और खरपतवार की अधिकता से धान की खेती महंगी हो गई है।

फारमर चैट ऐप के अनुसार, किसान सलाहकार अभय पाण्डेय ने बताया कि धान की रोपनी से पहले खरपतवारों का नियंत्रण जरूरी है। उन्होंने कहा कि खेत में उगे खरपतवारों को हाथ से निकालना सबसे असरदार तरीका है, खासकर जब वे छोटे हों। उन्होंने बताया कि ग्लाइफोसेट जैसे हरबिसाइड का उपयोग किया जा सकता है। इसे खेत में लगाने से पहले खेत को 2-3 दिन सूखा रखें। मल्चिंग भी एक उपाय है, जिससे खरपतवार की वृद्धि कम होती है और मिट्टी की नमी बनी रहती है। पाण्डेय ने बताया कि पैराक्वाट, अट्राज़िन और फ्लूफेनैसेट जैसे अन्य हरबिसाइड भी असरदार हैं। पैराक्वाट हरे पौधों पर तुरंत असर करता है। अट्राज़िन को रोपाई से पहले या बाद में लगाया जा सकता है। फ्लूफेनैसेट को जड़ी-बूटियों के साथ मिलाकर उपयोग किया जा सकता है। उन्होंने सलाह दी कि हरबिसाइड का उपयोग करते समय सुरक्षा उपायों का पालन करें और स्थानीय कृषि विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।

Khabare Abtak
Author: Khabare Abtak

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