मोतिहारी।
सुगौली के नवप्रवर्तक डॉ. प्रमोद स्टीफन को इंडिया अंतरराष्ट्रीय विज्ञान उत्सव में ‘क्लीन एनर्जी अवार्ड’ से सम्मानित किया गया। सम्मान प्राप्त करने के बाद सुगौली पहुंचने पर स्थानीय लोगों ने उनका स्वागत किया।
यह उत्सव हरियाणा के पंचकूला स्थित दशहरा ग्राउंड में 6 से 9 दिसंबर तक आयोजित हुआ था। इसमें देश-विदेश के वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और नवाचारकर्ताओं ने विभिन्न विषयों पर अपने विचार साझा किए। चार दिवसीय इस आयोजन में पर्यावरण संरक्षण, सतत ऊर्जा, जैव-विविधता, विज्ञान शिक्षा और तकनीकी नवाचारों पर विशेष सत्र हुए। सुगौली निवासी प्रमोद स्टीफन ने भी इसमें भाग लिया और अपने वैज्ञानिक शोध व तकनीकी नवाचार से ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने हरे कचरे को पूरी तरह पचाने और कम लागत में मीथेन गैस से कार्बन, सल्फर व वाष्पीय तत्वों को अलग कर शुद्ध बायोगैस उत्पादन पर एक पोस्टर व व्याख्यान प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और तकनीकी टीमों ने स्टीफन के प्रेजेंटेशन की सराहना की। उनके नवाचार की उपयोगिता और व्यवहारिकता को देखते हुए उन्हें प्रशस्ति पत्र और स्मृति-चिह्न देकर सम्मानित किया गया।
क्लीन एनर्जी अवार्ड प्राप्त करने के बाद डॉ. प्रमोद स्टीफन के सुगौली स्टेशन पहुंचने पर स्थानीय लोगों ने उनका स्वागत किया। इस अवसर पर लिली स्टीफन, पिंकी कुमारी, बिरा पंडित और हीरालाल प्रसाद सहित कई अन्य लोग उपस्थित थे। डॉ. स्टीफन ने बताया कि हरा और जैविक कचरा गांवों व शहरों दोनों में एक बढ़ती समस्या है। यदि इसका वैज्ञानिक तरीके से उपयोग किया जाए, तो इससे ऊर्जा उत्पादन के साथ-साथ प्रदूषण को भी नियंत्रित किया जा सकता है। उनकी विकसित तकनीक कम लागत में उच्च शुद्धता वाली बायोगैस बनाने में सक्षम है, जो घरेलू ईंधन, कृषि उपयोग और छोटे उद्योगों के लिए सहायक सिद्ध हो सकती है।


