मोतिहारी।
दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग पूर्वी चंपारण के मोतिहारी पहुंच गया है। विराट शिवलिंग जैसे ही पूर्वी चंपारण की धरती पर पहुंचा, वैसे ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। स्थापना से 12 दिन पहले श्रद्धालुओं ने शिवलिंग का भव्य स्वागत किया। कड़ाके की ठंड के बावजूद हजारों की संख्या में भक्त घंटों पहले से सड़क किनारे खड़े होकर शिवलिंग के स्वागत का इंतजार करते नजर आए। श्रद्धालु एक झलक देखने को वेताब दिखे। डुमरिया घाट पुल पार करते ही चारों ओर हर-हर महादेव के नारे गूंजे। जगह-जगह भव्य स्वागत द्वार बनाए गए थे, फूल-मालाओं और रोशनी से पूरे रास्ते को सजाया गया था। श्रद्धालुओं ने ढोल-नगाड़ों और शंखनाद के साथ भगवान शिव का अभिनंदन किया। कई स्थानों पर शिवलिंग को कुछ देर के लिए रोका गया, जहां भक्तों ने विधिवत पूजा-अर्चना की और जयकारे लगाए।
तमिलनाडु के महाबलीपुरम से लाया जा रहा यह शिवलिंग 21 नवंबर को चला था। जो एक माह सोलह दिन बाद डुमरियाघाट पुल होते हुए पूर्वी चम्पारण पहुंचा। इस दौरान शिवलिंग के साथ हजारों की संख्या में श्रद्धालु हर-हर महादेव के जयघोष जयघोष लगाते लगाते हुए हुए चलते नजर आए।
शिवलिंग खजुरिया से हुसैनी होते हुए केसरिया मार्ग से कैथवलिया के लिए प्रस्थान कर गया। विशाल शिवलिंग को 96 चक्कों वाले विशेष ट्रक के माध्यम से करीब 2500 किलोमीटर की दूरी तय कर बिहार लाया गया है। इसकी ऊंचाई 33 फीट और वजन लगभग 210 मीट्रिक टन है। इस शिवलिंग को महाबलीपुरम में एक ही ग्रेनाइट पत्थर को तराशकर तैयार किया गया है, जिसमें करीब 10 वर्षों का समय लगा। खास बात यह है कि मुख्य शिवलिंग पर 1008 छोटे शिवलिंग उकेरे गए हैं, जो इसे और भी विशिष्ट बनाते हैं।


