मोतिहारी।
सुगौली प्रखंड के गोड़ीगावा में ध्वस्त बांध की मरम्मत कर लिया गया। जिससे सिकरहना नदी की बह रही पानी का फैलाव रुक गया। मनरेगा, स्थानीय जनप्रतिनिधी, अधिकारी व ग्रामीणों के मुस्तैदी से दूसरे प्रयास के बाद सफलता मिली। जहां दो दिन की कड़ी मेहनत के बाद बांध को बांध लिया गया। यहां बता दें कि सोमवार को करीब 30 फीट में बांध ध्वस्त हो गया। जो बढ़ते बढ़ते करीब 50 फीट की दूरी तक हो गया। जहां से पानी का फैलाव सरेही इलाके में तेजी से होने लगी। जिसके दूसरे दिन सदर एसडीओ स्थानीय अधिकारियों के साथ ध्वस्त बांध का मुआयना किया। जिसके बाद बांध मरम्मती की योजना बनी। मंगलवार को टूटे बांध की मरम्मत का काम शुरू हुआ। बांस के बल्ले, टीना सीट व कुछ बालू भरे बोरे लगाए गए। लेकिन पानी की तेज धार सबको बहा दिया। जिससे यह प्रयास विफल रहा। जिससे लोग हतोत्साहित हो गए। फिर भी स्थानीय अधिकारियों ने हार नहीं मानी। पुन: गुरुवार को प्रयास शुरू किया गया। जिसमें पहले दिन करीब 60% बांध की मरम्मत कराई गई। दूसरे दिन कार्य को पूरा कर लिया गया। जहां से पानी का बहाव पूरी तरह से बंद हो गया।
चार हजार बोरा व 300 बांस से बांधा गया बांध
बांध मरम्मत व पानी रोकने के लिए करीब 4000 बोरा, 300 बांस लगे है। तकनीकी मशीन से बांस को दस फीट नीचे हलाया गया। कुछ टीना सीट का भी प्रयोग किया गया। जिसके बाद बोरी में बालू भर कर रखे गए। करीब 50 फीट ध्वस्त बांध और उसके दोनों तरफ 25-25 फीट में भी कटावरोधी कार्य किया गया। जिससे मजबूती मिल सके और अगल बगल में पानी का लिकेज न हो। वहीं इस कार्य में करीब तीन सौ मजदूर लगे है। स्थानीय मुखिया रंजीत झा ने बताया कि कड़ी मेहनत के बाद यह सफलता मिली है। अब पानी का बहाव रुक गया है। इस बाबत पीओ सतीस कुमार ने बताया कि मनरेगा द्वारा यह कार्य किया गया है। दुसरे प्रयास में सफलता मिली है। पानी समाप्त होने के बाद यहां पूर्व की तरह मिट्टी भर मजबूत कर दिया जाएगा।
इस तरह की मुस्तैदी धमनी टोला में नही दिखी थी अगर इसी तरह धूमनी टोला में मुस्तैदी रहा होता तो आज किसानों को यह दिन नहीं देखना पड़ता। जहां करीब छह साल पहले करीब 30-50 फीट बांध टूटा। धीरे धीरे बढ़ते हुए करीब 1500 फीट में आज बांध ध्वस्त है। उस वक्त सिस्टम के साथ जनप्रतिनिधि व ग्रामीण उदासीन रहे। अगर समय पूर्व गोड़ीगांवा जैसा प्रयास किया गया रहता तो इतनी बड़ी दूरी में बांध ध्वस्त नहीं हुआ रहता। ना हीं लोग बाढ़ का सामना करते। जहां भूमि अधिग्रहण के पेंच में प्रखंड के सुकुलपाकड़ धुमनी टोला के ध्वस्त बांध के निर्माण में ग्रहण लगा है। पूर्व के बाढ़़ में ध्वस्त बांध व जर्जर बांध की मरम्मती नही होने से आज यह स्थिती पैदा हो गई। 15 अगस्त 2017 में करीब 50 फीट सिरहना नदी के पास बाढ़ के दौरान बांध टूट गया। जिसका निर्माण अगले वर्ष भी नहीं हो पाया। जर्जर बांध की मरम्मत नहीं होने से वर्ष 21 में भी बांध ध्वस्त होते गया। धीरे धीरे यह बांध लालपरसा से पं.चंपारण क्षेत्र के कुछ हिस्से तक डेढ़ हजार फीट से अधिक ध्वस्त हो गया। हालांकि विते वर्ष हल्की बाढ आने से लोगों को खास क्षति नहीं पहुंचा। लेकिन इस वर्ष भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। करीब छह वर्ष बित जाने के बाद भी अबतक उक्त बांध नहीं बांधा जा सका है। जिससे स्थानीय लोगों में आक्रोश व्याप्त है।
कुछ वर्षों को छोड़ लगातार सुगौली में आ रही बाढ़ से हर वर्ष जान माल की भारी क्षति हुई है। इन बांधों की मरम्मत ससमय नहीं होने से बाढ़ काल बनकर हर वर्ष तबाही लेकर आ धमकती है। इस वर्ष भी धूमनी टोला के ध्वस्त बांध द्वारा पानी निकल लालपरसा, चीलझपटी आदि गांव को प्रभावित करते हुए सुकुलपाकड़ पंचायत सहित अगल बगल के कई पंचायतों को प्रभावित की है। जिससे उतरी क्षेत्र के सभी पंचायत में फसल को भारी नुकसान पहुंचा है।



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