बेतियां।
चंपारण की धरती एक बार फिर अपने साहसी बेटों के जुनून की गवाह बन रही है। जहाँ लोग केदारनाथ की कठिन चढ़ाई के नाम से ही सहम जाते हैं, वहीं पश्चिम चंपारण के दो युवाओं ने इस दुर्गम यात्रा को साइकिल और स्केटिंग के जरिए पूरा करने का बीड़ा उठाया है। आस्था और आत्मविश्वास का ऐसा संगम पहले शायद ही कहीं देखने को मिला हो।
साइकिल और स्केटिंग से तय होगा हजारों किमी का सफर
मझौलिया प्रखंड के बैठनिया भानाचक निवासी धर्मेंद्र कुमार साइकिल से और बेतिया के रानीपकड़ी निवासी कृष्णा कुमार स्केटिंग करते हुए बाबा केदारनाथ के दर्शन के लिए रवाना हुए हैं। बेतिया के ऐतिहासिक सागर पोखरा स्थित शिव मंदिर में मत्था टेकने के बाद दोनों ने अपनी इस चुनौतीपूर्ण यात्रा का श्रीगणेश किया।
अयोध्या-काशी होते हुए पहुंचेंगे उत्तराखंड
इन युवाओं का रूट चार्ट भी काफी खास है। ये सीधे केदारनाथ न जाकर रास्ते में अयोध्या, वाराणसी और हरिद्वार जैसे मुख्य तीर्थ स्थलों पर दर्शन-पूजन करते हुए आगे बढ़ेंगे। धर्मेंद्र के मुताबिक, इस सफर को पूरा करने और वापस लौटने में लगभग दो महीने का समय लग सकता है।
धार्मिक आस्था के साथ युवाओं को संदेश
सिर्फ भक्ति ही नहीं, बल्कि इस साहसिक कदम के पीछे एक बड़ा सामाजिक संदेश भी छिपा है। धर्मेंद्र ने बताया कि हमारी यह यात्रा युवाओं को यह बताने के लिए है कि अगर हौसला बुलंद हो, तो कोई भी राह कठिन नहीं होती। हम चाहते हैं कि आज की युवा पीढ़ी अनुशासन और सकारात्मक सोच के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़े।
फूल-मालाओं से हुआ भव्य स्वागत
जैसे ही इन दोनों युवाओं की रवानगी की खबर फैली, मझौलिया और बेतिया में भारी उत्साह देखा गया। स्थानीय लोगों ने फूल-मालाओं और “हर-हर महादेव” के जयकारों के साथ दोनों का हौसला बढ़ाया। ग्रामीणों का कहना है कि चंपारण की माटी ने हमेशा साहसी लोगों को जन्म दिया है और ये दोनों युवा नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेंगे।
ब्यूरो रिपोर्ट, Khabare Ab Tak


